परम पूज्य स्वामी श्रीगोविन्ददेव गिरिजी महाराज
संस्थापक अध्यक्ष, गीता परिवार
आज अंतःकरण अत्यंत आनंद से भरा हुआ है। 22 जून के दिन लखनपुरी में गीता परिवार के LearnGeeta.com के माध्यम से एक अत्यंत भव्य महोत्सव मनाया जा रहा है। आश्चर्य होता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कितना अद्भुत कार्य हम सबके माध्यम से करवा लिया है।
जब कोविड एक आपदा के रूप में समूचे देश और विश्व पर छा गया था, तब गीता परिवार के कार्यकर्ताओं ने इस आपदा को अवसर में परिवर्तित किया। उन्होंने लगन, निष्ठा और एकाग्रता के साथ कार्य करते हुए वह कर दिखाया, जो सामान्यतः असंभव प्रतीत होता है—और इस सेवा पर भगवान की कृपा भी निरंतर बरसती रही।
ऐसा प्रतीत होता है कि गीता के 11वें अध्याय में भगवान जिस विश्वरूप का दर्शन कराते हैं, उसी का साक्षात अनुभव हमें Learn Geeta के माध्यम से विश्वभर में फैले इस कार्य की विराट रूपरेखा में हुआ है।
आज 180 देशों तक संपर्क स्थापित हो चुका है और 12.5 लाख से अधिक गीता प्रेमियों ने इस मंच से जुड़कर पंजीकरण कराया है। यह केवल गीता के प्रचार का कार्य नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की सेवा का एक दिव्य, अद्भुत और विराट स्वरूप है।
आश्चर्य होता है कि 13 भाषाओं में चलने वाले ये वर्ग प्रातः 4 बजे से प्रारंभ होकर रात्रि 2 बजे तक संचालित होते हैं। इस सम्पूर्ण कार्य हेतु 12,000 से अधिक युवा भाई-बहन निःस्वार्थ भाव से सेवा में लगे हुए हैं।
पाँच देशों में Learn Geeta का विधिवत पंजीकरण हो चुका है। 355 ऑफ़लाइन बाल संस्कार केंद्र संचालित हो रहे हैं और 40 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन भी हो चुका है। यह सब कार्य निरंतर जारी है।
अब यह निःस्वार्थ सेवा अपने पाँच वर्ष पूर्ण कर रही है। जब हम इस पंचवर्षपूर्ति महोत्सव को मना रहे हैं, तब स्मरण होता है कि यह कार्य 23 जून 2020 को प्रारंभ हुआ था और आज, 22 जून 2025, को हम इसका उत्सव मना रहे हैं।
2020 से 2025 तक की यह पाँच वर्षीय यात्रा वास्तव में एक ऐसा कार्यकाल रहा है, जो आसमान को छू लेने जैसा है। इस अवसर पर अत्यंत हर्ष के साथ मैं सभी कार्यकर्ताओं और सेवा में लगे सभी सेवियों को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद अर्पित करता हूँ। मैं उनका भी अभिनंदन करता हूँ जिन्होंने गीता को पूर्णतः या आंशिक रूप से कंठस्थ कर लिया है।
यह सम्पूर्ण कार्य डॉ. आशू गोयल के कुशल निर्देशन में संचालित हुआ है और कार्याध्यक्ष डॉ. संजय मालपाणी जी ने उन्हें पूर्ण संरक्षण और प्रोत्साहन प्रदान किया है। आप सभी ने जिस श्रद्धा, भक्ति और उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ इस कार्य को विस्तार दिया है, वह देखकर न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व अचंभित है। यह स्पष्ट है कि यह सेवा कार्य परमात्मा को प्रिय है, और प्रभु स्वयं इस सेवा के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ निर्मित करते रहे हैं।
यह कार्य उसका सजीव प्रमाण है—समय-समय पर जब जो आवश्यकता रही, वह सहज उपलब्ध होती गई और कारवाँ बढ़ता गया।
सभी सेवियों का पुनः अभिनंदन करते हुए, और इन पाँच वर्षों में महीने में एक बार आकर अपने आशीर्वचन देने वाले संत-महात्माओं का नमन करते हुए, मैं पुनः उन सभी संतों से आशीर्वाद माँगता हूँ कि यह कार्य कभी रुके नहीं, बल्कि और भी गति से आगे बढ़े।
हम चाहते हैं कि यह सेवा सम्पूर्ण विश्व तक पहुँचे, क्योंकि यही भगवान की सर्वोपरि सेवा है। श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि जो भगवद्गीता का अध्ययन करता है, प्रचार करता है और इसका प्रसार करता है—वह मुझे अत्यंत प्रिय है, और मैं उससे उतना प्रेम करता हूँ, जितना किसी और से नहीं कर सकता।
आज जब मानवता छटपटा रही है और दिशा की तलाश में है, तब गीता का यह दिव्य संदेश और Learn Geeta का यह अभियान अत्यंत सराहनीय, अभिनंदनीय और भारत माता तथा सनातन धर्म की सेवा का सर्वोच्च स्वरूप है।
ऐसे कार्यों के लिए हमें कभी रुकना नहीं है। हमें अपने कार्य का सतत निरीक्षण करते हुए, निरंतर आगे बढ़ते जाना है। आज हमारा मंत्र यही होना चाहिए—“आगे बढ़ो, बढ़ते रहो।”
प्रभु ने हमें अपने कार्य हेतु निमित्त रूप में चुना है—यह हमारा परम सौभाग्य है। यदि हम इसी भाव से सेवा करते रहें, तो यह देश अपने आप अंधकार से मुक्त होगा, संगठित होगा, और जिस रामराज्य की हम कल्पना करते हैं, वह भगवद्गीता के माध्यम से अवश्य साकार होगा।
यह उतल पुथल उत्ताल लहर पथ से डिगा नहीं पाएगी
पतवार चलाते जाएंगे —-मंजिल आयेगी, आयेगी…. मंजिल आयेगी, आयेगी ।
भारत माता की जय
—परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्ददेव गिरिजी महाराज