











गीता परिवार की ऑनलाइन गीता कक्षाएँ: एक सेवा, एक साधना
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते |
तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति || 4. 38 ||
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प से प्रेरित गीता परिवार वर्षों से ज्ञान और सेवा के संगम को साकार करता आ रहा है। इस अभियान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है—विवेचन विभाग, जो आध्यात्मिकता और आधुनिकता का एक अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करता है।
प्रत्येक सप्ताह, सोमवार से शुक्रवार तक आयोजित होने वाली दैनिक गीता संथा कक्षाएँ साधकों को शुद्ध उच्चारण के साथ श्लोकों का अभ्यास कराती हैं। इन कक्षाओं में न केवल पाठ होता है, अपितु साधना का भाव भी जागृत होता है। इसी श्रृंखला में, शनिवार और रविवार को आयोजित होने वाले विवेचन सत्र एक सशक्त आध्यात्मिक मंच के रूप में उभरे हैं—जहाँ श्लोकों के गूढ़ अर्थों का विवेचन तज्ञों द्वारा होता है, और जीवनदर्शन की गहराइयों में प्रवेश मिलता है।
इन सत्रों का संचालन ज़ूम मीटिंग्स के माध्यम से होता है। प्रार्थना तथा दीप प्रज्वलन, जो ज्ञान और पवित्रता के प्रतीक है, प्रत्येक सत्र की शुरुआत में एक आध्यात्मिक वातावरण निर्मिती करते है।
एकाग्रता और भावपूर्णता के साथ इन सत्रों में विश्वभर के साधक एकत्रित होकर श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों और उनके जीवनदायी अर्थों को सुनकर उनका चिंतन करते हैं।
विवेचन उपरांत, इन सत्रों को विविध ११ भाषाओं में लिपिबद्ध करने का कार्य गीता परिवार की विवेचन राइटिंग टीम द्वारा किया जाता है। भाषा के विषय-विशेषज्ञ इन विवेचनों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करते हैं, जिससे यह ज्ञान अधिक लोगों तक पहुॅंचें और अथिक व्यापक और सुलभ बन सके।
यह स्पष्ट है कि ये सत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं—बल्कि आधुनिक जीवन की उलझनों में एक प्रकाश-पुंज, एक मार्गदर्शक चेतना हैं। गीता परिवार का यह प्रयास सिद्ध करता है कि यदि भाव शुद्ध हो, तो तकनीक भी अध्यात्म का वाहक बन सकती है।
इस सेवा का प्रारंभ परम पूज्य गुरुदेव गोविंददेव गिरी जी महाराज के आशीर्वाद से हुआ, और इसे गीता विशारद, डॉ. संजय मालपाणी भैया, गीता विशारद डॉ. आशू गोयल भैया, गीता विशारद श्रीनिवास वर्णेकरजी, गीता विदुषी वंदना काकीजी, तथा गीता प्रवीण रूपल शुक्ला दीदी और गीता प्रवीण कविता वर्मा दीदी के सहयोग से प्रारंभिक स्वरूप प्रदान किया गया।आज आदरणीय श्रद्धा रावदेव जी, आदरणीय विकास वैद्य जी भी उन्हें सहयोग दे रहे हैं तथा गीता प्रवीण ज्योती शुक्लाजी, आदरणीय श्रुती नायक जी व गीताव्रती जानवी देखणे जी बालक विशेष विवेचन प्रदान करने हेतू जुड चुके है ।
वर्तमान में ये विवेचन सत्र हिंदी और अंग्रेज़ी में आयोजित किए जा रहे हैं। निकट भविष्य में इन्हें विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी विस्तार करने का विचार है।
जो साधक आत्मिक उत्थान, शांति, और जीवनदर्शन की खोज में हैं, उनके लिए ये साप्ताहिक गीता विवेचन सत्र एक अमूल्य अवसर हैं। इनमें भाग लेकर न केवल स्वयं को लाभान्वित किया जा सकता है, अपितु परिवार और समाज को भी उस दिव्य प्रकाश की ओर अग्रसर किया जा सकता है—जिसे श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को प्रदान किया था।
कृपया अपना मनपसंद विवेचन सत्र खोजने के लिए आप निम्न चयन विकल्पों का उपयोग करें।
