पूज्य स्वामी श्री गोविंददेवगिरिजी महाराज द्वारा स्थापित गीता परिवार मुख्य रूप से बाल संस्कार क्षेत्र में गत ४ दशकों से कार्यरत है। बाल संस्कार के लिए कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण गीता परिवार की एक प्रमुख गतिविधि है जिसके अंतर्गत शाखा स्तर पर एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर तीन दिवसीय निवासी कार्यकर्ता शिविर तक आयोजित किए जाते हैं। गत ५ वर्षों में लर्न गीता के माध्यम से हजारों नए लोग गीता परिवार से जुड़े हैं। ऐसे अनेक नए कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए अंचल अनुसार कार्यकर्ता शिविरों के आयोजन का निर्णय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में किया गया।
पश्चिमांचल के लिए प्रथम शिविर कोटा में दि ४ से ६ जनवरी २०२५ को आयोजित किया गया। पश्चिमांचल के प्रभारी श्री गोविंदजी माहेश्वरी तथा वरिष्ठ कार्यकर्ता श्रीमती निर्मलाजी मारू, श्री दामोदरजी मारू के नेतृत्व में एलेन प्रतिष्ठान के भवन में यह शिविर संपन्न हुआ। शिविर की सफलता के लिए श्रीमती अंकिताजी राठी, श्रीमती नीनाजी माहेश्वरी, श्री विपुलजी गुप्ता, श्री विजयजी मित्तल, श्रीमती शिल्पा गोयल आदि कार्यकर्ताओं ने कार्य किया। श्री गोविंदजी माहेश्वरी ने अपने मधुर स्वर में भजन गाकर सभी को प्रफुल्लित कर दिया। इस शिविर में १२० शिविरार्थी सहभागी हुए।
दूसरा शिविर पूर्वांचल के कार्यकर्ताओं के लिए दि ९ से १२ जनवरी २०२५ को कोलकाता के निकट जोका में आयोजित किया गया। पश्चिमांचल की प्रभारी श्रीमती आशाजी साबू तथा श्री संदीपजी सोमानी, श्री अशोकजी साबू के नेतृत्व में स्वामीनारायण मंदिर के भव्य परिसर में यह शिविर संपन्न हुआ। श्रीमती बुलबुल जी पोद्दर, श्री जवाहर कर्मकार, श्रीमती पियाली दत्ता गुप्ता श्रीमती महलिका घोष, श्री जयदेब रॉय आदि कार्यकर्ताओं ने इस शिविर के लिए अनेक दिनों तक प्रचार-प्रसार, आयोजन के लिए कार्य किया। इस शिविर में १६० शिविरार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
तीसरा शिविर मध्यांचल के कार्यकर्ताओं के लिए दि १४ से १७ मार्च २०२५ को पुणे में आयोजित किया गया। मध्यांचल की प्रभारी श्रीमती प्रमिलाजी माहेश्वरी तथा श्रीमती अंजलीजी तापड़िया, श्री सत्यनारायणजी मूंदड़ा, श्रीमती संतोषी मूंदड़ा, श्री शामजी मणियार के नेतृत्व में महेश भवन में यह शिविर संपन्न हुआ। इस शिविर के लिए श्रीमती विद्याजी म्हात्रे, श्री दीपकजी भूतड़ा, श्री प्रणयजी चौमवाल, श्रीमती विद्या पाथरीकर, श्रीमती कल्पना मालू, श्रीमती मंजू डागा, वेदिका कुलकर्णी, श्री पुष्करजी, श्रीमती संगीताजी मणियार, आदि ने परिश्रम किया। इस शिविर में २०० कार्यकर्ताओं ने पूर्ण समय रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
चौथा शिविर अयोध्या में दि १८ से २१ अप्रेल २०२५ में संपन्न हुआ। अयोध्या की महिमा ही ऐसी है कि इस शिविर में उत्तरांचल की सीमाएं लाँघकर चार देशों और १७ राज्यों तक के कार्यकर्ताओं ने सहभाग लिया। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आशु गोयल के नेतृत्व में और श्रीमती प्रमिला जी माहेश्वरी, श्री दत्ताजी भांदुर्गे की प्रमुख उपस्थिति में ये शिविर संपन्न हुआ। सुश्री रूपल शुक्ला, श्री जितेंद्र कुमार, सुश्री ज्योति शुक्ला, सुश्री कविता वर्मा, श्रीमती पूजा गोयल ने भी शिविर में प्रशिक्षण दिया।
इस शिविर में 4 देशों, 76 नगरों, और 17 राज्यों से कार्यकर्ता पधारे। विभिन्न ध्यान, प्रार्थना, खेल, गीत, रचनात्मक आदि सत्रों के माध्यम से सभी ने बालकों में संस्कारों का बीजारोपण कैसे किया जाये इसका स्पष्ट मार्गदर्शन भी पाया।
इसमें कुल 104 पुरुष एवं 102 महिला साधकों ने भाग लिया, जिनका समर्पण और उत्साह पूरे शिविर में देखने को मिला।
गीता परिवार के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. आशू गोयल भैया का प्रेरणादायी सत्र “स्वनिर्माण एवं राष्ट्रनिर्माण” सभी के हृदय में गहराई तक उतरा। उन्होंने बताया कि यदि हम एक श्रेष्ठ साधक बनें, तो उसी से कार्यकर्ता का जन्म होता है, और वही साधना आगे चलकर समाज निर्माण का प्रकाश बनती है।
उनका “गीता षट्क” विषय पर सत्र और बच्चों को गीता कैसे सिखाएँ, इस पर दिया गया मार्गदर्शन, विशेष रूप गीता साधकों हेतु उपयोगी एवं प्रेरणादायी रहा।
शिविर में ६१० संस्कार शिविरों तथा ५० केन्द्रों का संकल्प लिया गया।
चारों ही शिविर अत्यंत सफल हुए किंतु मध्यांचल शिविर के सहभागियों को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हुआ – पूज्य स्वामीजी के दर्शन और आशीर्वचन का! प्रथम दिन ही पूज्य स्वामीजी अपने अत्यंत व्यस्त कार्यों से समय निकाल कर शिविर स्थल पर पहुंचे और उन्होंने सभी शिविरार्थियों को गीता परिवार के कार्य एवं इसके उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्य व्यक्ति विशेष पर नहीं बल्कि एक ध्येय पर आधारित है। इस अवसर पर सभी को वो समय भी स्मरण हो आया जब गीता परिवार के प्रत्येक कार्यकर्ता शिविर को पूज्यश्री के पावन सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त होता था। पुणे के कार्यकर्ताओं ने छत्रपति शिवाजी, संत ज्ञानेश्वर, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के वेश में पूज्यश्री का स्वागत किया।
गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ संजयजी मालपाणी की पूर्णकालिक उपस्थिति ने पश्चिमांचल एवं मध्यांचल के शिविर की गरिमा को शतगुणित कर दिया। उन्होंने गीता परिवार की कार्यप्रणाली, कार्ययोजना, कार्यलक्ष्य, कार्यसंकल्प एवं “जानो गीता बनो विजेता” इन विषयों पर मार्गदर्शन किया। अंतिम दिन कार्यकर्ताओं के मन में उठने वाले प्रश्नों के उत्तर भी दिए। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आशुजी गोयल के मार्गदर्शन का लाभ पूर्वांचल के शिविर को प्राप्त हुआ जिसमे उन्होंने टीम-११, स्वनिर्माण, राष्ट्रनिर्माण, गीता इन विषयों पर व्याख्यान दिए। राष्ट्रीय सह-सचिव श्री गिरीशजी डागा ने पश्चिमांचल, मध्यांचल एवं पूर्वांचल के तीनों ही शिविरों में “मुख्य शिक्षक” के रूप में अपने दायित्व का निर्वाह किया और पूज्य स्वामीजी द्वारा दी गई “पंचसूत्री” पर विस्तृत व्याख्यान दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने बाल मनोविज्ञान, टॉक शो, प्रत्यक्षिक प्रबोधन आदि विषयों पर भी मार्गदर्शन किया। मध्यांचल प्रभारी श्रीमती प्रमिलाजी माहेश्वरी भी तीनों ही शिविरों में उपस्थित रहीं और उन्होंने प्रज्ञा संवर्द्धन प्राणायाम, विद्यालय कार्य विस्तार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया। उनकी ऊर्जा एवं उनके अविरल-अथक कार्य साधना का ही ये प्रभाव है कि उनकी उपस्थिति मात्र ही कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर देती है। मुख्य कार्यालय के प्रभारी श्री दत्ता जी भांदुर्गे ने इन तीनों ही शिविरों में योगासन, सूर्यनमस्कार, मैदानी एवं बैठे खेल विषयों पर प्रशिक्षण दिया। इसमें अर्जुन युवा मंच के कार्यकर्ता श्री श्रीधर बंसोड़े, श्री चंद्रकांत पवार, श्री सागर परिहार, श्री समर्थ पवार तथा श्री जितेंद्र कुमार जी ने उनका साथ दिया। संगमनेर के श्री सौरभ जी म्हालस ने पूर्वांचल एवं मध्यांचल शिविरों में नाट्य प्रशिक्षण का विषय लिया। इसके अतिरिक्त श्रीमती निर्मलाजी मारू, श्रीमती अंजली जी तापड़िया, श्रीमती रेखाजी मूंदड़ा, श्रीमती सोनल जिंदल, श्रीमती अनीता शिवशंकर, श्री प्रदीपजी राठी आदि ने विशेष विषयों के प्रशिक्षण दिए तथा अन्य स्थानीय कार्यकर्ताओं ने हस्तकला, संस्कृत संथा जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया।
श्री गिरीशजी डागा, श्रीमती संगीताजी जाधव एवं सुश्री रूपल शुक्ला ने इन शिविरों के लिए “संस्कार साधना पथ-प्रदर्शिका” नाम से १८५ पृष्ठों का एक अभ्यासक्रम तैयार किया जिसके आधार पर इन शिविरों में प्रशिक्षण दिया गया। इन तीनों ही शिविरों में प्रशिक्षण तथा इसमें किए गए कार्य संकल्प के आधार पर शिविर पश्चात अनेक स्थानों पर नए-नए साप्ताहिक संस्कार वर्ग आरम्भ हुए। अनेक कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने स्थान पर नए-नए विद्यालयों से संपर्क कर वहाँ संस्कार कार्य का सूत्रपात किया। पश्चिमांचल के शिविर में संजय भैया ने सभी को इतना उत्साहित कर दिया कि वहाँ के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने संकल्प किया कि गीता परिवार के ४० वर्ष पूर्ति पर वे कोटा में राष्ट्रीय स्तर का महोत्सव आयोजित करेंगे। पूर्वांचल के शिविर में तो असम, नेपाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तरार-पूर्व, बंगाल आदि राज्यों से कार्यकर्ता आए थे। इन्होंने विपरीत परिस्थितिओं में भी जो कार्य आरम्भ किया है वह अत्यंत प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। मध्यांचल के शिविर में यह तय हुआ कि अगले वर्ष सम्पूर्ण मध्यांचल में कुल एक लाख तेईस हज़ार बच्चों का “शक्ति-भक्ति महोत्सव” आयोजित किया जाएगा।