गीता विशारद डॉ.आशू जी गोयल
प्रोग्राम डायरेक्टर, लर्नगीता, अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष,गीता परिवार
पञ्चवर्ष पूर्ति महोत्सव- लर्नगीता
“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥” (गीता 6.5)
जीवन की कठिनाइयाँ हमें गिरा भी सकती हैं और ऊँचा उठा भी सकती हैं। महामारी का समय ऐसा ही था, जब बहुत से प्रयास ठहर गये, वहीं गीता परिवार ने इसे अवसर बनाकर लर्नगीता के रूप में नई दिशा दी। यह संभव हुआ केवल परमपूज्य स्वामीजी श्री गोविन्ददेव गिरिजी महाराज के दिव्य आशीर्वाद और उनके प्रेरक मंत्र “गीता पढ़ें, पढ़ायें, जीवन में लायें” से।
पाँच वर्षों की साधना यात्रा
पाँच वर्षों में लर्नगीता ने यह सिद्ध कर दिया कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का प्रकाशस्तम्भ है।
- 2020 में 2500 साधकों और 100 सेवियों से आरम्भ हुई यह साधना आज 13.5 लाख साधकों और 14,000 सेवियों के विराट स्वरूप में विकसित हो चुकी है।
- 3 भाषा से प्रारंभ होकर आज 13 भाषाओं में सुबह 4 बजे से रात 2 बजे तक अविराम गीता प्रवाह।
- केवल पठन वर्ग से आगे बढ़कर व्याकरण वर्ग, बाल वर्ग, कंठस्थ वर्ग, विशेष विवेचन सत्र और परीक्षा-उपाधि आदि अनेक आयाम।
- जेलों में गीता, विद्यालयों में संस्कार शिक्षा, और बालकों हेतु विशेष वर्ग जैसी प्रेरक पहलें।
यह सब केवल आँकड़े नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और सामूहिक साधना का परिणाम है।
सेवा का अनुपम स्वरूप
“नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।” (गीता 3.8)
लर्नगीता की विशेषता है — निस्वार्थ सेवा।
- कोई प्रशिक्षक बनता है,
- कोई तकनीकी सहायक,
- कोई कॉलिंग या संचालन में योगदान देता है।
हर सेवा, गीता के महायज्ञ में आहुति बनती गई। यही समर्पण आज लर्नगीता को विश्व का सबसे बड़ा गीता अध्ययन मंच बना चुका है।
भविष्य की दिशा – “गीतामय विश्व”
पाँच वर्ष पूर्ण होने पर अब हमारी दृष्टि और भी व्यापक है। आने वाले दशक में लर्नगीता का संकल्प है:
- वैश्विक विस्तार (Global Outreach): भारत के घर घर तक पहुँचने के बाद अब लक्ष्य है हर देश, हर नगर, हर घर तक पहुँचना।
- 24×7 गीता अध्ययन: विश्वभर के समयानुसार चौबीसों घंटे गीता वर्ग उपलब्ध कराना।
- गुणवत्ता और विस्तार साथ-साथ: साधकों और सेवियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, ऐसे में गुणवत्ता बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
- साहित्य और विवेचन: विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें और मार्गदर्शिकाएँ प्रकाशित करना; बालकों हेतु विशेष साहित्य की रचना।
- Team 11 मूल्य शिक्षा: विद्यालयों और क्षेत्र-क्षेत्र में ऑफ़लाइन संस्कार-कक्षायें स्थापित करना, ताकि बाल्यकाल से संस्कार के बीज विकसित हों।
- समग्र विकास: केवल साधकों तक सीमित नहीं, विद्यालयी विद्यार्थी, गृहस्थ, अधिकारी, महिलाएँ, कैदी, सभी को गीता से जोड़ना।
- नया संगठनात्मक ढाँचा: बढ़ते कार्यों को सुव्यवस्थित करने हेतु एक पारदर्शी और उत्तरदायी संरचना।
- डिजिटल सशक्तिकरण: लर्नगीता ऐप और प्लेटफ़ॉर्म को और सरल व सुलभ बनाना, कम-नेटवर्क क्षेत्रों, दिव्यांग साधकों और वैश्विक स्तर पर सभी के लिए सुविधाजनक।
- सेवी प्रशिक्षण व अकादमी: प्रशिक्षकों, तकनीकी सहायकों और समन्वयकों के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और सतत् मार्गदर्शन।
- शोध व साझेदारी: विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से सहयोग कर शोध व मान्यता (accreditation) के नए मार्ग खोलना।
- वार्षिक प्रभाव रिपोर्टिंग: आँकड़ों से आगे जाकर परिवर्तन की कहानियों को प्रस्तुत करना, ताकि पारदर्शिता और प्रेरणा दोनों बढ़ें।
“गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः।”
यह पाँच वर्षों की यात्रा हमें गर्व से भर देती है। परंतु यह एक आरम्भघोष है, आने वाला दशक गीता जागरण का होगा। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: “हर घर गीता, हर कर गीता” एवं जितना अधिक यह संकल्प साकार होता जायेगा, एक शांतिमय, तेजोमय समृद्ध गीतामय विश्व का निर्माण होता जायेगा।
श्रीकृष्णार्पणमस्तु!
– डॉ. आशू गोयल