
उनचालीस वर्ष पूर्व, राष्ट्रसंत परम पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज के दिव्य नेतृत्व में गीता परिवार ने एक अत्यंत पावन संकल्प लिया — “बाल संस्कार से राष्ट्र निर्माण” यह केवल एक नारा नहीं ,अपितु भारत के भविष्य को संवारने वाली एक महा योजना का आरंभ था । इस संकल्प का मूल उद्देश्य था – बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क में संस्कार, संस्कृति और नैतिकता के बीज बो कर उन्हें आदर्श नागरिक बनाना ।
संस्कार केंद्र: जड़ें भारतीय संस्कृति की, ऊँचाई राष्ट्र निर्माण की
भारत के गाँव-गाँव, नगर-नगर में गीता परिवार द्वारा बाल संस्का र केंद्रों का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बच्चों को :
- योग व प्राणायाम से आत्म अनुशासन
- ध्यान व कथा -कथन से शांति व प्रेरणा
- नैतिक शिक्षा एँ से व्यवहारिक जीवन मूल्य
- श्री भगवद्गीता का पाठ व देशभक्ति गीतों के माध्यम से आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना
- कला , शिल्प व खेल के ज़रिए रचनात्मक विकास सिखाया जाता है।
यह केंद्र बच्चों को शिक्षित ही नहीं, संस्कारित भी कर रहे हैं, जिससे एक सशक्त भारत का निर्माण सुनिश्चित होता है।
को रो ना का ल में ‘लर्न गी ता ’: संकट में संबल
महामारी के समय जब कक्षाएँ ठप पड़ गई थीं , तब गीता परिवारका ‘लर्न गीता ’ ऑनलाइन उपक्रम एक आशा की किरण बनकर उभरा । इसने हजारों घरों में गीता ज्ञान का प्रकाश पहुँचाया । इसी प्रयास से ‘गीता मैत्री मिलन’ और उसके बाद ‘टीम 11’ जैसे संगठनात्मक प्रयासों ने संघटन में ऊर्जा और गति भर दी।
500 से अधिक गीता सेवी : सेवा की भावना से साकार हो रहा संकल्प
आज 500 से अधिक गीता सेवी , पूरे विश्व में ऑफलाइन गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।
ये सेवी :
- गीता श्लोकों का सही उच्चारण और अर्थ सिखाते हैं |
- बच्चों को योग, नैतिकता ,ध्यान और देशभक्ति से जोड़ते हैं |
- श्री मद्भगवद्गीता पारायण, बाल प्रतियोगिताएं, प्रेरक कहानियों द्वारा विकास और नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करते हैं |
- स्कूलों , समाजों ,जेलों और महिलाओं तक भी संस्कारों का प्रकाश पहुँचा रहे हैं|
इनसेवीयों का समर्पण, समय और सेवा भाव, गीता परिवार की शक्ति और भाव का जीवंत उदाहरण हैं |
संपूर्ण भारत व विदेश में प्रभाव: संस्कृति की पताका
आज गीता परिवार का यह अभियान न केवल भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों ,बल्कि विदेशों में भी सक्रिय है। लाखों बालक-बालिकाएं:
- श्री मद्भगवद्गीता से जुड़कर जीवन जीने की कला सीख रहे हैं |
- अपनी संस्कृति व राष्ट्र के प्रति चेतनाशील हो रहे हैं |
- एक संस्कारयुक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव रख रहे है|
जब सेवा और संकल्प मिलें, तो राष्ट्र पुनः उठ खड़ा हो ता है
“संस्कार ही शक्ति है, संस्कार ही भविष्य है” – इसी मंत्र को लेकर गीता परिवार सामूहिक गीता पारायण,
बाल संस्कार केंद्र, टीम 11, लर्न गीता , और गीता मैत्री मिलन जैसी पहल के माध्यम से, हर आयु वर्ग तक गीता का ज्ञान और जीवन मूल्य पहुँचा रहा है। 500 से अधिक समर्पित गीता सेवी , इस परवर्तन के वाहक हैं। वे केवल कक्षा नहीं चला रहे, वे भारत के भविष्य का स्वरूप गढ़ रहे हैं|