“जहाँ श्लोकों की लय में आत्मा का आरोहण होता है, वहीं पारायण केवल पठन नहीं, पुनर्जन्म बन जाता है।”
संपूर्ण गीता पारायण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह आत्मिक परिष्कार की एक दिव्य प्रक्रिया है। ‘पारायण’ शब्द स्वयं में एक गूढ़ संकेत है—‘पार’ यानी सीमा या तट, और ‘आयन’ यानी मार्ग। यह वह यात्रा है जिसमें साधक इस पार की सीमाओं को पार कर उस पार की चेतना तक पहुँचता है।
यह साधना केवल श्लोकों का उच्चारण नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धि, विचारों की स्थिरता और आत्मबोध की ऊँचाई का यज्ञ है। “पारायण वह दीप है, जो साधक के भीतर नया प्रकाश भरता है।”
संपूर्ण गीता पारायण : एक वर्ष, एक सौ अवसर, एक अविरत आराधना
लर्न गीता उपक्रम के शुभारंभ के पश्चात, श्रीकृष्ण कृपा से संपूर्ण गीता पारायण के अनेक पावन अवसर हमें प्राप्त हुए। यह पारायण केवल श्लोकों का पठन नहीं, अपितु एक भक्तिपूर्ण साधना है—जहाँ हर श्लोक में आत्मा का स्पंदन, हर छंद में श्रीकृष्ण का साक्षात्कार होता है।
न्यास के पश्चात्, संपूर्ण 700 श्लोकों का लयबद्ध, छंदबद्ध, तालबद्ध पठन होता है। क्षमा याचना और गीता आरती के साथ यह पारायण पूर्णता को प्राप्त होता है। हर बार, हर अवसर पर, यह पठन हमें नए अर्थ, नई अनुभूति और नई दिशा प्रदान करता है।
17 सितंबर 2023 को सेवकों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक रविवार प्रातः 6.30 बजे संपूर्ण गीता पारायण होगा। 24 दिसंबर 2023 को गीता जयंती के पावन दिन अखंड अष्टादश पारायण सम्पन्न हुआ—जो साधकों के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक पर्व था। देखते-देखते एक वर्ष बीत गया और सितंबर 2024 में प्रथम वर्षपूर्ति का उत्सव भी पारायण के साथ मनाया गया। उसी वर्ष गीता जयंती महोत्सव में 25 नवंबर से 12 दिसंबर तक छब्बीस पारायण सम्पन्न हुए। और फिर एक दिव्य संयोग—भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दिन ही 100वां संपूर्ण गीता पारायण सम्पन्न हुआ। यह संयोग नहीं, अपितु भगवान का आशीर्वाद ही था।
गीता पारायण का प्रभाव साधक के जीवन में प्रत्यक्ष दिखाई देता है। इससे मन की एकाग्रता बढ़ती है, आत्मबल का विकास होता है और जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि किसी संकल्प के साथ पारायण किया जाए तो संकल्प सिद्धि की अद्भुत अनुभूति होती है। स्वयं भगवान गीता में कहते हैं—
“अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः,
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः॥” (18.70)
अर्थात जो श्रद्धा से गीता का अध्ययन करता है, वह ज्ञानयज्ञ करता है और वह भगवान को अत्यंत प्रिय होता है।
पूज्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज सदैव हमें प्रेरित करते हैं कि गीता पारायण केवल पठन न बने, बल्कि जीवन की साधना बने। उनके जीवन का संकल्प ही है—वेदों की रक्षा, गीता का प्रचार और संत परंपरा का संवर्धन। वे कहते हैं—“गीता परिवार का हर सदस्य चलता-फिरता गीता-दूत बने।”
अब 2025 का गीता जयंती महोत्सव हमारे सामने है। इस वर्ष गीता परिवार अपनी 40वीं वर्षगांठ भी मना रहा है। स्वाभाविक ही है कि इस अवसर पर अनेक संपूर्ण गीता पारायणों के माध्यम से हम इस उत्सव को और भी भव्य, आनंदपूर्ण और प्रेरणादायक बनाएँगे।
संपूर्ण गीता पारायण साधक के लिए आत्मोन्नति की साधना है, समाज के लिए एकता का संदेश है और राष्ट्र के लिए आध्यात्मिक आलोक है। यह एक ऐसी अविरत आराधना है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें सत्य, शांति और समर्पण की ओर ले जाती रहेगी।
🌸 जय श्रीकृष्ण! जय गीता माँ! 🌸